First Lokpal of India Justice Pinaki Chandra Ghose

भारत के पहला लोकपाल जस्टिस पिनाकी चंद्रघोष बने: 

1. 19 मार्च 2019 को न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष के भारत का पहला लोकपाल नियुक्‍त किया गया है । इस पद के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा मंजूरी प्रदान कर दी गई है। पिनाकी चंद्र घोष देश के पहले लोकपाल के रूप में 23 मार्च 2019 को शपथ ली ।



2. न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष मई 2017 में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश पद से सेवानिवृत्त हुए थे । वे लोकपाल अध्यक्ष बनने से पूर्व राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य थे ।



3. लोकपाल के सदस्‍यों के रूप में उच्च न्यायालयों के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों- न्यायमूर्ति दिलीप बी भोसले, न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार मोहंती, न्यायमूर्ति अभिलाषा कुमारी तथा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश अजय कुमार त्रिपाठी को नियुक्त किया गया है ।


4. इसके अलावा सशस्त्र सीमा बल की पूर्व पहली महिला प्रमुख अर्चना रामसुंदरम, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव दिनेश कुमार जैन, पूर्व आईआरएस अधिकारी महेंद्र सिंह और गुजरात कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी इंद्रजीत प्रसाद गौतम लोकपाल के गैर न्यायिक सदस्य बनाया गया हैं ।


5. लोकपाल के नियमानुसार एक अध्यक्ष और अधिकतम आठ सदस्यों का प्रावधान है। इनमें से चार न्यायिक सदस्य एवं लोकपाल के सदस्यों में 50 प्रतिशत अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और महिलाएं होनी चाहिए ।

6. लोकपाल के अध्यक्ष और सदस्य पांच साल के कार्यकाल तक या 70 वर्ष की उम्र तक पद पर बने रह सकते हैं । लोकपाल अध्यक्ष का वेतन और भत्ते भारत के मुख्‍य न्यायाधीश के समतुल्‍य व उनके सदस्यों को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के बराबर वेतन और भत्ते दिए जाएंगे ।


भारत में लोकपाल का सफर:

7. भारत में पहली बार एक संवैधानिक लोकपाल की अवधारणा 1960 के दशक के शुरुआत में कानून मंत्री अशोक कुमार सेन द्वारा संसद में प्रस्तावित किया गया था ।


8. प्रथम जन लोकपाल विधेयक 9 मई 1968 को धानमंत्री इंदिरा गांधी सरकार में शांति भूषण द्वारा प्रस्तावित किया गया था लेकिन राज्यसभा में नहीं पास हो पाया । लोकपाल बिल ’1971, 1977, 1985, 1989, 1996, 1998, 2001, 2005 और 2008 में लाया गया फिर भी कभी पास नहीं हुए।


9. वर्ष 2002 में वेंकट चेलैया आयोग ने संविधान समीक्षा आयोग में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकपाल की सख्त जरूरत बताई तथा 2005 में वीरप्पा मोइली के नेतृत्व में दूसरा प्रशासनिक सुधार आयोग गठित किया गया । 2011 में भी प्रणव मुखर्जी के नेतृत्व वाले मंत्रियों के समूह ने लोकपाल की जरूरत पर बल दिया। इस तरह 8 नाकाम प्रयासों के बाद भारत का लोकपाल बिल 17 दिसंबर 2013 को राज्यसभा और 18 दिसंबर 2013को लोकसभा में पास हो गया। दोनों सदनों में पास होने के बाद राष्ट्रपति ने भी तत्काल बिल को मंजूरी प्रदान करने के उपरांत लोकपाल विधेयक को अंततः 18 दिसंबर 2013 को भारत में लागू किया गया । 

 विश्‍व में प्रथम लाकपाल:


10.  विश्‍व में पहला लोकपाल वर्ष 1809 में स्वीडन में नियुक्‍त किया गया था । स्वीडन सहित विश्‍व के अन्य देशों में लोकपाल को ओम्बड्समैन कहा जाता है। इसे नागरिक अधिकारों का संरक्षक माना जाता है। यह एक ऐसा स्वतंत्र और सर्वोच्च पद है जो लोक सेवकों के विरुद्ध शिकायतों की सुनवाई करता है। साथ ही संबंधित जांच-पड़ताल कर उसके खिलाफ उचित कार्रवी के लिए सरकार को सिफारिश भी करता है।

11. ओम्बड्समैन को ही भारत में लोकपाल और लोकायुक्त कहा जाता है । भारत में लोकपाल का नामकरण वर्ष 1963 में भारत के मशहूर कानूनविद डॉ लक्ष्‍मी मल सिंघवी ने किया था । केंद्र में लोकपाल एवं राज्‍यों में लोकायुक्त होता है। लोकपाल शब्द संस्कृत के शब्द लोक (लोगों) और पाल (संरक्षक) से मिलकर बना है।




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